Monday, September 18, 2017

ज़िन्दगी की किताब के पन्ने

आँखों में 
फिर चमकने लगे हैं 
यादों के कुछ लम्हें
गूंजने लगी हैं कान में 
वो तमाम बातें 
जो कभी हमने की ही नहीं 
नज़र आई कुछ तस्वीरें 
जो वक़्त ने खींच ली होगी 
और तुम्हारा ही नाम 
पढ़ रहा था हर कहीं 
जब पलट रहा था मैं 
ज़िन्दगी की किताब के पन्ने


Tuesday, September 12, 2017

अमरबेल की तरह

दिल के शज़र की
इक शाख़ पे
इक रोज़
रख दिया था बेचैनी ने
तेरी याद का
इक टुकड़ा
और आज़
दिल के शजर की
कोई शाख़ नहीं दिखती
तेरी याद ने ढ़ाँक लिया है
अमरबेल की तरह
अब वहाँ
दिल नहीं है
सिर्फ तेरी याद है

Monday, September 11, 2017

एहसास की डोलची

दिल के कमरे में अब
वीरानी पसर चुकी है
ख़्वाबों की अलमारी
कब से पड़ी है खाली
उम्मीदों की तस्वीरों ने
खो दिए हैं रंग अपने
आस की खिड़की भी
अब कभी नहीं खुलती
अश्क़ों की नमी से ऊग आई है
एक कोने में यादों की काई
हाँ
ठसाठस भरी है दर्द से
एहसास की दिल के कमरे में अब
वीरानी पसर चुकी है
ख़्वाबों की अलमारी
कब से पड़ी है खाली
उम्मीदों की तस्वीरों ने
खो दिए हैं रंग अपने
आस की खिड़की भी
अब कभी नहीं खुलती
अश्क़ों की नमी से ऊग आई है
एक कोने में यादों की काई
हाँ
ठसाठस भरी है दर्द से
एहसास की डोलची
रेखाचित्र-अनुप्रिया