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सैकड़ों खानों में

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सैकड़ों खानों में जैसे बंट गयी है ज़िन्दगी साथ रहकर भी लगे है अज़नबी है ज़िन्दगी
झांकता हूँ आईने में जब भी मैं एहसास के यूँ लगे है मुझको जैसे कि नयी है ज़िन्दगी
न तो मिलने कि ख़ुशी है न बिछड़ जाने का ग़म हाय ये किस मोड़ पे आकर रुकी है ज़िन्दगी
सीख ले अब लम्हें-लम्हें को ही जीने का हुनर कौन जाने और अब कितनी बची है ज़िन्दगी
वस्ल भी है, प्यार भी है, प्यास भी है जाम भी फिर भी जाने क्यों लगे है अनमनी है ज़िन्दगी
अब कहाँ तन्हाई ओ' तन्हाई का साया नदीश उसके ख़्वाबों और ख़्यालों से सजी है ज़िन्दगी
चित्र साभार : गूगल

मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने

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मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने इश्क़ की राह को आसान कर दिया तूने
ख़लिश मैं ओस की महसूस करूं फूलों में दिल के एहसास को कैसा असर दिया तूने
रहेगी याद ये सौग़ात उम्र भर तेरी सिर्फ़ आंसू ही सही कुछ मगर दिया तूने
न कोई नक्स-ए-पा है न कोई मंजिल के निशां मेरी हयात को ये रहगुज़र दिया तूने
ख़ुद अपने घर में ही मेहमान हो गया है 'नदीश' मेरे एहसास को ऐसा सफ़र दिया तूने

चित्र साभार : गूगल

ख़्वाब भी होने लगे हैं नम

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गिर रही है आँख से शबनम तुम्हारे हिज़्र में एक ही बस एक ही मौसम तुम्हारे हिज़्र में
क़तरे-क़तरे में शरारों सी बिछी है चांदनी  बन गयी है हर ख़ुशी मातम तुम्हारे हिज़्र में
आईना-ओ-धूप के बिन अक्स न साया मेरा किस क़दर तनहा हूँ मैं हमदम तुम्हारे हिज़्र में
खो गयी है अब नज़र की तिश्नगी जाने कहाँ  अश्क़ में डूबा है ये आलम तुम्हारे हिज़्र में
दे भी जाओ अब सनम आकर सुकूं दिल को मेरे या बता जाओ करें क्या हम तुम्हारे हिज़्र में
तुम नहीं तो सांस भी भारी लगे है बोझ सी यूँ ही निकलेगा लगे है दम तुम्हारे हिज़्र में
फ़िक्र-ए-दुनिया है न खुद की है ख़बर कोई मुझे अब ख़ुशी है न ही कोई ग़म तुम्हारे हिज़्र में
फूल उम्मीदों के सारे आज कांटे बन गए  हर क़दम पतझर का है मौसम तुम्हारे हिज़्र में
एक-एक लम्हा लगे है अब क़यामत सा नदीश ख़्वाब भी होने लगे हैं नम तुम्हारे हिज़्र में


चित्र साभार : गूगल

दिल की हर बात

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दिल की हर बात मैं कहूँ किसको अपने हालात मैं कहूँ किसको
मैंने खोया तो पा लिया दिल ने जीत कर मात मैं कहूँ किसको
अश्क़ भी याद भी है, ग़म भी है इनमें सौगात मैं कहूँ किसको
अब्र के साथ आँख भी बरसे अबके बरसात मैं कहूँ किसको
तुम नहीं तो नहीं है रंग कोई दिन किसे रात मैं कहूँ किसको
ज़िस्म बेदिल 'नदीश' सबके यहाँ अपने जज़्बात मैं कहूँ किसको
चित्र साभार : गूगल