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Showing posts from September, 2013

ग़र मेरे एहसास कुछ नहीं

आँख को रोते देखा

मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से

दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम

प्यार करें