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रफ़्तार

रफ़्तार

मनुष्य के दर्शन

लौट गई तन्हाई भी

ख्वाब की तरह से

चाँदनी की तरह

फेफड़ों को खुली हवा न मिली

मिला जो शख़्स

ज़िन्दगी की किताब के पन्ने

अमरबेल की तरह

एहसास की डोलची

इक तेरे जाने के बाद

शब्द बिखर जाते हैं

शायद तुम नहीं जानती

ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

सौग़ात हो गई

सोया हुआ ज्वालामुखी

न सोई आँखें

लम्हा-ए-विसाल था

प्यार आपका मिले

अधिकार याद रहे कर्तव्य भूल गए

महके है तेरी याद से

जिंदगी की तरह

मौसम दिखाई देता है

कहकशां बनाते हैं

छांव बेच आया है-क़तआत

जुगनू से बिखर जाते हैं

बेकल बेबस तन्हा मौसम

देश कहाँ है

जो भी ख़लिश थी दिल में

सीने से लगाये रखना

आदमी से आदमी

मौसम है दिल में

मार देते हैं

औलाद का फर्ज़