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Showing posts from March, 2017

कितना मुश्किल रहा है वो

हुए गुम क्यूँ

संवरती रही ग़ज़ल

तस्वीर भेजी है

ज़िन्दगी का मौसम

बेताब दिल की

विश्वास रहने दो

आँख में ठहरा हुआ

शायरी के लिये

सीने में छिपाये रक्खा