मिला जो शख़्स


बिछड़ते वक़्त तेरे अश्क़ का हर इक क़तरा
लिपट के रास्ते से मेरे तरबतर निकला

खुशी से दर्द की आँखों में आ गए आंसू
मिला जो शख़्स वो ख़्वाबों का हमसफ़र निकला

रोज दाने बिखेरता है जो परिंदों को
उसके तहख़ाने से कटा हुआ शजर निकला

हर घड़ी साथ ही रहा है वो नदीश मेरे
दर्द का एक पल जो खुशियों से बेहतर निकला

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