चाँदनी की तरह

प्यार हमने किया ज़िन्दगी की तरह
आप हरदम मिले अजनबी की तरह

मैं भी इंसां हूँ, इंसान हैं आप भी
फिर मिलते क्यों नहीं आदमी की तरह

मेरे सीने में भी इक धड़कता है दिल
प्यार यूँ न करें दिल्लगी की तरह

दोस्त बन के निभाई है जिनसे वफ़ा
दोस्ती कर रहे हैं दुश्मनी की तरह

हमको कोई गिला ग़म से होता नहीं
गर ख़ुशी कोई मिलती ख़ुशी की तरह


आज फिर से मेरे दिल ने पाया सुकूं
सोचकर आपको शायरी की तरह

ग़म की राहों में जब भी अंधेरे बढ़े
अश्क़ बिखरे सदा चाँदनी की तरह

काश दिल को तुम्हारे ये आता समझ
इश्क़ मेरा नहीं हर किसी की तरह

याद आई है जब भी तुम्हारी नदीश
तीरगी में हुई रोशनी की तरह


चित्र साभार-गूगल

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