रफ़्तार

गतांक से आगे...
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दो घंटे बाद
रिपोर्टर- कैसे हुई दुर्घटना
चश्मदीद- भैया हम कई सालों से यहां चाय की दुकान चला रहे हैं, जब से सरकार ने चौड़ी और चिकनी सपाट सड़क बनाई है, आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
आज भी ये लड़के बहुत ज्यादा तेजी से मोटर साइकिल चलाते हुये आ रहे थे और सुना है सबने बहुत शराब भी पी रखी थी। तेज गाड़ी चलाने की होड़ और मस्ती-मज़ाक करते-करते आपस में ही टकरा गए। गाड़ी की रफ़्तार तेज होने के कारण गाड़ी सड़क पर घिसट गई और लड़के खून से लथपथ हो गए, हेलमेट नहीं पहने होने के कारण सबके सिर पर चोट आयी थी और खून काफी ज्यादा बह गया था। जिससे एक दो लड़कों की मौत तो यहीं हो गई थी।
रिपोर्टर- किसी बड़ी गाड़ी ने तो टक्कर नहीं मारी।
चश्मदीद- अरे नहीं-नहीं इतनी चौड़ी सड़क है, आने जाने का अलग-अलग रास्ता, फोरलेन सड़क है। वैसे भी दिन में तो सड़क ज्यादातर खाली ही रहती है,भारी वाहन तो रात में गुजरते हैं।

3 घंटे बाद
रिपोर्टर- सर, सड़क दुर्घटना पर मेरी रिपोर्ट तैयार है।
संपादक- क्या तुम्हारी रिपोर्ट में।
रिपोर्टर- सर, लड़के अपनी गलती से दुर्घटना का शिकार हुए हैं, इसमें किसी की गलती नहीं है। सड़क लगभग खाली थी और सभी लड़के ड्राइविंग के समय शराब पिये हुए थे।
संपादक- अच्छा! अब ख़ामोश रहना और ये बात बाहर किसी से मत कहना। सेठ जी हमारे बड़े विज्ञापनदाता हैं, क्या समझे।
रिपोर्टर- लेकिन सर...
संपादक- कहा न चुप रहो और सुनो अब तुम ये खबर नहीं बनाओगे।
तभी संपादक का फोन बजता है और थोड़ी देर बाद फोन काटते हुए अपने खास रिपोर्टर को बुलाता है और उसको सारी बात समझाता है।
संपादक- इस दुर्घटना की रिपोर्टिंग तुम बनाओ और इस दुर्घटना के लिए पूरी तरह से सरकार और प्रशासन को ही जिम्मेदार ठहराना।
समझ गए न...पत्रकार, संपादक की ओर देखता है और फिर जोर का अट्टहास गूंजता है।

दूसरे दिन सुबह
शहर के प्रमुख अखबारों की हेडलाइन...
प्रशासन की लापरवाही और अदूरदर्शिता ने मासूमों की जिंदगी छीनी,
सड़क निर्माण में नहीं हुआ सही मापदंडों का पालन,
सरकार ने किया सभी मृतक लड़कों के परिजनों को एक-एक करोड़ के मुआवजे का ऐलान...
चित्र साभार-गूगल

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