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मनुष्य के दर्शन

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खाली बैठे-बैठे ईश्वर ने सोचा कि चलो धरती का भ्रमण कर अपने बनाये मनुष्य का हालचाल लिया जाए। मनुष्य के आपसी प्रेम और बंधुत्व की भावना को परखा जाए। मनुष्यता और मानवीयता के विषय पर मनुष्य का विकास देखा जाए। धरती पर "मनुष्य" से भेंट की जाए। यही सोचकर धरती पर आए ईश्वर की नज़र एक मंत्री जी पर पड़ी। उन्होंने जान लिया कि मंत्री जी एक सामाजिक कार्यक्रम में जा रहे हैं। ईश्वर ने सोचा कि इसे ही माध्यम बनाया जाए और उन्होंने उसकी काया में प्रवेश कर लिया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मंत्री जी का भव्य स्वागत देखकर ईश्वर को बड़ी खुशी हुई, उन्हें लगा मनुष्य में आपसी प्रेम कितना विकसित हो गया है। तभी नेताजी को पुष्पहारों से लादकर उनकी चरणवंदना देखकर ईश्वर को जल्द ही समझ में आ गया कि इन सारे प्रयोजनों का आशय कुछ और ही है और ईश्वर को ये देखकर बड़ी निराशा हुई।
तभी सामाजिक संगठन के सचिव ने मंत्री जी से कहा... आइये मान्यवर आपका सामाजिक बंधुओं से परिचय करा दूँ... वोट बैंक की मजबूती के लिए मंत्री जी सचिव के साथ चल दिये। सचिव- मान्यवर ये हैं मिस्टर बिल्डर, शहर की अधिकांश गगनचुम्बी इमारतों के …