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फेफड़ों को खुली हवा न मिली

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फेफड़ों को खुली हवा न मिली
न मिली आपसे वफ़ा न मिली

दुश्मनी ढूँढ़-ढूंढ़ कर हारी
दोस्ती है जो लापता न मिली

वक़्त पे छोड़ दिया है सब कुछ
दर्दे-दिल की कोई दवा न मिली

हर किसी हाथ में मिला खंज़र
आपकी बात भी जुदा न मिली

है न हैरत, जहां में कोई भी
खुशी, ग़मों से आशना न मिली

सोचता है नदीश ये अक्सर
ज़िन्दगी आपके बिना न मिली



चित्र साभार-गूगल

ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

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साँसों ने चाहा ओ' दिल ने दुआ दी मिला साथ तेरा ज़िन्दगी मुस्कुरा दी
सोचा था भुलाऊंगा यादों को तेरी मगर याद ने सारी दुनिया भुला दी
ग़ज़ब कर दिया मेरे एहसास ने भी मुहब्बत को तन्हाइयों की सज़ा दी
वही कह रहे हैं मुझे बेवफ़ा अब जिन्हें तोहफ़े में हम ही ने वफ़ा दी
उसकी आरज़ू में नदीश हमने अपनी उम्र ये सारी तन्हा तन्हा बिता दी

सौग़ात हो गई

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पल भर तुमसे बात हो गई
ख़ुशियों की सौग़ात हो गई

दुश्मन है इन्सां का इन्सां
कैसी उसकी जात हो गई

आँखों में है एक कहकशां
अश्कों की बारात हो गई

वक़्त, वक़्त ने दिया ही नहीं
बातें  अकस्मात  हो  गई

जख़्म मिले ता-उम्र जो नदीश
रिश्तों  की  सौग़ात  हो गई


चित्र साभार-गूगल

न सोई आँखें

ख़्वाब जिसके तमाम उम्र संजोई आँखें
उसकी यादों ने आंसुओं से भिगोई आँखें

तेरे ख़्वाबों की हर एक वादा खिलाफी की कसम
मुद्दतें हो गई है फिर भी न सोई आँखें

जिक्र छेड़ो न अभी यार तुम जमाने का
हुस्न के ख़्वाबों-ख्यालों में है खोई आँखें

फूल में याद के बिखरी हुई है शबनम सी
रात भर यूँ लगे है जैसे कि रोई आँखें

हाले-दिल कह न सके हम भी और नदीश यहाँ
मेरी आँखों को भी न पढ़ सकी कोई आँखें

प्यार आपका मिले

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गुलों की राह के कांटे सभी खफ़ा मिले मुहब्बत में वफ़ा की ऐसी न सज़ा मिले
अश्क़ तो उसकी यादों के क़रीब होते हैं तिश्नगी ले चल जहाँ कोई मैक़दा मिले
कहूँ कैसे मैं कि इस शहर-ए-वफ़ा में मुझको जितने भी मिले लोग सभी बेवफ़ा मिले
राह में रौशनी की, थे सभी हमराह मेरे अँधेरे बढ़ गए तो साये लापता मिले
आओ तन्हाई में दो-चार बात तो कर लो महफ़िल में तुम हमें मिले तो क्या मिले
क्या यही हासिल-ए-वफ़ा है, परेशान हूँ मैं कुछ तो आंसू, ख़लिश ओ दर्द के सिवा मिले
आप पे हो किसी का हक़ तो वो नदीश का हो और मुझको ही फ़क़त प्यार आपका मिले चित्र साभार- गूगल