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ग़र मेरे एहसास कुछ नहीं

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ग़र मेरे एहसास कुछ नहीं तो फिर मेरे पास कुछ नहीं
आँखों में ये आँसू तो हैं हाँ कहने को खास कुछ नहीं
कितने रिश्ते-नाते मेरे होने का आभास कुछ नहीं
ज़िन्दा जो मेरी सांसों से उससे भी अब आस कुछ नहीं
अब नदीश मिलने आये हो ज़िस्म बचा है सांस कुछ नहीं
चित्र साभार: गूगल

आँख को रोते देखा

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ये करिश्मा मोहब्बत में होते देखा लब पे हँसी, आँख को रोते देखा गुजरे हैं मंज़र भी अज़ब, आँखों से साहिल को कश्तियाँ डुबोते देखा
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मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से

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मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से  फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से 
आँगन तेरी आँखों का न हो जाये कहीं तर  डरता हूँ इसलिए मैं वफ़ा के बयान से 
साहिल पे कुछ भी न था तेरी याद के सिवा  दरिया भी थम चुका था अश्क़ का उफ़ान से 
नज़रों से मेरी नज़रें मिलाता है हर घड़ी  इकरार-ए-इश्क़ पर नहीं करता ज़ुबान से 
कटती है ज़िन्दगी नदीश की कुछ इस तरह  हर लम्हां गुज़रता है नये इम्तिहान से 
चित्र साभार : गूगल 

दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम

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दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम धड़कने लगता है  वीरां-वीरां आँखों में एक ख्वाब चमकने लगता है 
साँसों की ही खातिर तुझको माँगा है इस जीवन ने  तुझको न सोचे तो ये दिल यार मचलने लगता है 
चुभ जाते हैं अश्क़ों के कांटे यादों के बिस्तर पे  नींदों का पतझर आकर बेज़ार दहकने लगता है 
जुगनू, खुश्बू, चाँद-सितारे, बादल, गुलशन और फिज़ा  जब तुम मेरे पास न हो तो माहौल अखरने लगता है 
कैसे हाल सुनाये अपने दिल का तुमको कहो नदीश  आँखों से आंसू बनकर ये दर्द छलकने लगता है 
                                                              चित्र साभार : गूगल

प्यार करें

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कड़ी है धूप चलो छाँव तले प्यार करें  जहाँ ठहर के वक़्त आँख मले प्यार करें 
नज़रिया बदलें तो दुनिया भी बदल जाएगी  भूल के रंजिशें, शिकवे-ओ-गिले प्यार करें 
वफ़ा ख़ुलूस के जज्बों से लबालब होकर फूल अरमानों का जब-जब भी खिले प्यार करें 
दिलों के दरम्यां रह जाये न दूरी कोई  चराग़ दिल में कुर्बतों का जले प्यार करें 
तमाम नफ़रतें मिट जाये दिलों से अपने  तंग एहसास कोई जब भी खले प्यार करें 
कौन अपना या पराया नदीश छोडो भी  मिले इंसान जहाँ जब भी भले प्यार करें 
*चित्र साभार-गूगल

सैकड़ों खानों में

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सैकड़ों खानों में जैसे बंट गयी है ज़िन्दगी साथ रहकर भी लगे है अज़नबी है ज़िन्दगी
झांकता हूँ आईने में जब भी मैं एहसास के यूँ लगे है मुझको जैसे कि नयी है ज़िन्दगी
न तो मिलने कि ख़ुशी है न बिछड़ जाने का ग़म हाय ये किस मोड़ पे आकर रुकी है ज़िन्दगी
सीख ले अब लम्हें-लम्हें को ही जीने का हुनर कौन जाने और अब कितनी बची है ज़िन्दगी
वस्ल भी है, प्यार भी है, प्यास भी है जाम भी फिर भी जाने क्यों लगे है अनमनी है ज़िन्दगी
अब कहाँ तन्हाई ओ' तन्हाई का साया नदीश उसके ख़्वाबों और ख़्यालों से सजी है ज़िन्दगी
चित्र साभार : गूगल

मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने

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मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने इश्क़ की राह को आसान कर दिया तूने
ख़लिश मैं ओस की महसूस करूं फूलों में दिल के एहसास को कैसा असर दिया तूने
रहेगी याद ये सौग़ात उम्र भर तेरी सिर्फ़ आंसू ही सही कुछ मगर दिया तूने
न कोई नक्स-ए-पा है न कोई मंजिल के निशां मेरी हयात को ये रहगुज़र दिया तूने
ख़ुद अपने घर में ही मेहमान हो गया है 'नदीश' मेरे एहसास को ऐसा सफ़र दिया तूने

चित्र साभार : गूगल

ख़्वाब भी होने लगे हैं नम

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गिर रही है आँख से शबनम तुम्हारे हिज़्र में एक ही बस एक ही मौसम तुम्हारे हिज़्र में
क़तरे-क़तरे में शरारों सी बिछी है चांदनी  बन गयी है हर ख़ुशी मातम तुम्हारे हिज़्र में
आईना-ओ-धूप के बिन अक्स न साया मेरा किस क़दर तनहा हूँ मैं हमदम तुम्हारे हिज़्र में
खो गयी है अब नज़र की तिश्नगी जाने कहाँ  अश्क़ में डूबा है ये आलम तुम्हारे हिज़्र में
दे भी जाओ अब सनम आकर सुकूं दिल को मेरे या बता जाओ करें क्या हम तुम्हारे हिज़्र में
तुम नहीं तो सांस भी भारी लगे है बोझ सी यूँ ही निकलेगा लगे है दम तुम्हारे हिज़्र में
फ़िक्र-ए-दुनिया है न खुद की है ख़बर कोई मुझे अब ख़ुशी है न ही कोई ग़म तुम्हारे हिज़्र में
फूल उम्मीदों के सारे आज कांटे बन गए  हर क़दम पतझर का है मौसम तुम्हारे हिज़्र में
एक-एक लम्हा लगे है अब क़यामत सा नदीश ख़्वाब भी होने लगे हैं नम तुम्हारे हिज़्र में


चित्र साभार : गूगल